एक राजा जिसने सारे राज वैभव होते हुए भी दिगम्बरत्व धारण किया और समूचे प्राणी जगत को सत्य, और अहिंसा मार्ग दिखाया। 
आज हम बात कर रहें हैं अहिंसा के प्रमुख प्रणेता भगवान महावीर की।

 

महावीर जयंती है, जैन समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक शुभ त्योहार है। यह जैन धर्म के अंतिम और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव है। 

महावीर जन्मोत्सव के इस पावन पर्व पर चलिए जानते हैं भगवान् महावीर और उनके द्वारा दिए गए सिद्धांतों के बारे में…

 

महावीर स्वामी 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर हैं। 

भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष पहले वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में अयोध्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार हुआ था। 

30 वर्ष की कम आयु में प्रभू महावीर ने संसार से विराग लेकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। 

12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान (supreme wisdom) प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशर्ण में ज्ञान प्रसारित किया। 

72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुडिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समुदाय द्वारा महावीर स्वामी के जन्मदिवस के मोक्ष दिवस को दिपावली के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है।

 

 

कैसे मनाया जाता है भगवान महावीर का जन्मोत्सव?

 

महावीर जयंती देश विदेश में जैनियों द्वारा बड़े हर्ष और भक्ति के साथ मनाई जाती है। यह पावन उत्सव आमतौर पर प्रात:काल की शुभ बेला में भगवान महावीर की प्रतिमा के अभिषेक के साथ शुरू होता है। 

जैन मंदिरों में गीत संगीत के साथ विशेष पूजा विधान और आरती आयोजित की जाती है, और भगवान महावीर की स्तुति में भक्ति गीत गाए जाते हैं। जैन अनुयायी गाजे-बाजे और भगवान के रथ के साथ धार्मिक जुलूस, प्रभातफेरी, शोभायात्रा निकालते हैं। इसी के साथ महावीर स्वामी के बाल रूप को पालने में भी झुलाया जाता है। 

 

 

भगवान महावीर द्वारा दिए गए सिद्धांत 

 

चलिए अब बात करते हैं महावीर भगवान् और जैन धर्म के सिद्धांत की -

जैन धर्म में पंचशील सिद्धांत का बहुत महत्व है।

सत्य (हमेशा सच बोलना चाहिए)

अहिंसा (किसी भी जीव को दुःख नहीं पहुँचाना चाहिए)

अस्तेय (किसी भी प्रकार की चोरी नहीं करना चाहिए)

अपरिग्रह (विषय व वस्तुओं के प्रति अत्यधिक लगाव नहीं होना चाहिए)

ब्रह्मचर्य (शुभ विचारों से अपने वीर्य का रक्षण करना चाहिए)

भगवान महावीर ने दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें स्वयं को पसन्द हो। यही महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धान्त है।

 

“जियो और जीने जीने दो, किसी को दुख मत दो, जीवन सभी प्राणियों को प्रिय है।”  इस महावीर जयंती पर  हम प्रण लेते हैं कि भगवान महावीर द्वारा दिए गए इस सिद्धांत का अनुसरण अपने जीवन में अवश्य करेंगे 

 

 

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